महतारी सदन निर्माण घोटाला, ज़मीन पर ‘धंसा’ विकास

महतारी सदन या भ्रष्टाचार सदन?
देवनगर में सरकारी योजना का कब्रिस्तान, बरसात से पहले धंसा ‘विकास’

सूरजपुर।जिला मुख्यालय सूरजपुर एवं ब्लॉक मुख्यालय रामानुजनगर से मात्र 10 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत देवनगर में छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना महतारी सदन भवन के निर्माण को लेकर गंभीर और चौंकाने वाले भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। हालात इतने बदतर हैं कि भवन परिसर में बनाया गया पियोर ब्लॉक का रास्ता बरसात शुरू होने से पहले ही धंसने लगा है, जिससे पूरे निर्माण की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि महतारी सदन के निर्माण में सरकारी मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई है। भवन के साथ-साथ परिसर एवं आसपास बनाए जा रहे पियोर ब्लॉक मार्ग में न तो निर्धारित बेस तैयार किया गया और न ही आवश्यक मात्रा में रेत एवं मुरुम का उपयोग किया गया। केवल मिट्टी पाटकर नाम मात्र की रेत डालकर ब्लॉक बिछा दिए गए, जो पहली ही बारिश से पहले धंसने लगे।


बरसात से पहले खुल गई पोल, बारिश में क्या होगा हाल?

ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि जब अभी, बिना बारिश के, रास्ता धंसने लगा है तो पूरे मानसून में सड़क और महतारी सदन भवन की क्या स्थिति होगी। घटिया निर्माण के चलते न केवल सरकारी धन की भारी बर्बादी हुई है, बल्कि भविष्य में दुर्घटनाओं और जान-माल के नुकसान की आशंका भी प्रबल हो गई है।

जिम्मेदार मौन, निरीक्षण नदारद

सबसे गंभीर बात यह है कि निर्माण स्थल पर न तो नियमित तकनीकी निरीक्षण हुआ और न ही गुणवत्ता जांच की कोई पारदर्शी व्यवस्था नजर आई। इससे यह संदेह और गहराता जा रहा है कि पूरा निर्माण कार्य ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया है।

महिलाओं के नाम पर योजना, भ्रष्टाचार की भेंट

महतारी सदन योजना महिलाओं की सुविधा, सुरक्षा और सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन देवनगर में जिस तरह से यह भवन और रास्ता तैयार किया गया है, उसने शासन की मंशा को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। महिलाओं के नाम पर स्वीकृत योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।

निर्माण पूर्ण दिखाकर भुगतान का खेल?

सूत्रों की मानें तो निर्माण कार्य को कागजों में पूर्ण दर्शाकर भुगतान भी किया जा चुका है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यह मामला अब सिर्फ घटिया निर्माण का नहीं, बल्कि सीधे-सीधे सरकारी धन के दुरुपयोग का प्रतीत होता है।

  • ग्रामीणों की चेतावनी और प्रशासन से मांग
  • ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है 
  • पूरे निर्माण कार्य की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए
  • गुणवत्ता की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच हो
  • दोषी ठेकेदार, इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए
  • आवश्यकता पड़ने पर निर्माण कार्य को दोबारा मानक अनुसार कराया जाए

ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मामले को लेकर उच्चस्तरीय जांच और आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर भ्रष्टाचार पर संज्ञान लेगा, या फिर महतारी सदन भी कागजों में “पूर्ण” और जमीन पर “ध्वस्त” योजनाओं की सूची में शामिल हो जाएगा?

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