संयुक्त जिला कार्यालय के सामने नाली में गिरी कार, प्रशासनिक लापरवाही की खुली तस्वीर

जब जिले का प्रशासनिक केंद्र ही सुरक्षित नहीं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या भरोसा?

सूरजपुर। जिले के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक परिसर संयुक्त जिला कार्यालय के सामने एक कार खुले नाले में गिर गई। यह घटना न सिर्फ़ एक दुर्घटना है, बल्कि सिस्टम की उस लापरवाही का सबूत है, जिसे रोज़ देखा जाता है और रोज़ नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।

दुर्घटना ने खोली व्यवस्था की पोल

घटना की तस्वीर में साफ़ दिख रहा है कि सड़क किनारे बनी नाली पर ढक्कन नहीं है। न कोई चेतावनी बोर्ड, न बैरिकेडिंग और न ही सुरक्षा संकेत। नतीजा-कार का आगे का पहिया सीधे नाली में जा धँसा। गनीमत रही कि बड़ा हादसा नहीं हुआ।

प्रशासनिक दावों पर सवाल

यह वही स्थान है जहाँ रोज़ाना-

जिला स्तर के अधिकारी

कर्मचारी

जनप्रतिनिधि

और सैकड़ों आम नागरिक

आवागमन करते हैं।

जब सूरजपुर के प्रशासनिक केंद्र का यह हाल है, तो ग्रामीण और कस्बाई इलाकों की स्थिति का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं।

हादसे से पहले क्यों नहीं जागता प्रशासन?

प्रशासन हर बार घटना के बाद सक्रिय होता है

हादसा हुआ

फोटो वायरल हुई

फिर अस्थायी सुधार

और कुछ दिनों बाद वही हाल।

क्या नाली पर ढक्कन लगाना, चेतावनी बोर्ड लगाना और नियमित निरीक्षण करना इतना मुश्किल काम है?

आम नागरिक होता तो क्या होता?

यदि इस जगह कोई पैदल यात्री, बुज़ुर्ग, महिला या बच्चा गिर जाता, तो परिणाम गंभीर हो सकते थे। सवाल यह भी है कि-

क्या हादसे की गंभीरता व्यक्ति की हैसियत देखकर तय होगी?

यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी है। विकास और स्मार्ट सिटी के दावे तब खोखले लगते हैं, जब बुनियादी सुरक्षा भी नदारद हो।

अब वक्त है कि-

जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय हो

पूरे शहर में खुली नालियों का तत्काल सर्वे हो

और स्थायी समाधान लागू किया जाए

क्योंकि अगली बार नाली में सिर्फ़ कार नहीं, किसी की ज़िंदगी भी गिर सकती है।

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